राजेश ने चाचा जी के सामने सारी बातें बता दी थीं। कमरे में पापा, मम्मी, चाचा और अमित — सभी मौजूद थे। जैसे ही चाचा जी बोले,
“अमित, ये मैं क्या सुन रहा हूँ बेटा… अब यही दिन देखना बाकी रह गया था?”
अमित का सिर शर्म से झुक गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहे।
चाचा जी ने फोन लेकर गोल्डी के भाई के हाथ में दे दिया। उसने अमित के फोन से गोल्डी की सारी फोटो डिलीट कर दी — गैलरी से, Google Drive से, हर जगह से। जाते-जाते उसने सख्त आवाज़ में कहा,
“अब समझाने की जरूरत नहीं… आगे से खुद समझ जाना।”
गोल्डी को भी मना कर दिया गया कि अब कॉल ना करे।
उस दिन अमित का दिल पूरी तरह टूट गया। अगले दिन होली थी, लेकिन उसने कोई रंग नहीं खेला। चारों तरफ खुशियाँ थीं, पर उसकी जिंदगी से रंग खत्म हो चुके थे।
घरवालों ने तय किया कि अमित को बाहर भेज देना ही सही रहेगा। होली के अगले दिन उसे अहमदाबाद भाई के पास भेज दिया गया। घर से निकलते समय उसकी आंखों में सिर्फ आँसू थे। रास्ते भर वो गोल्डी की पुरानी रिकॉर्डिंग सुनता रहा और रोता रहा।
अहमदाबाद में काम करते हुए भी उसका मन कहीं नहीं लगता था। हर समय बस एक ही बात दिमाग में चलती — “ऐसा नहीं होना चाहिए था…”
एक हफ्ते बाद अचानक गोल्डी का कॉल आया। उसकी आवाज़ सुनते ही अमित जैसे फिर से जी उठा। दोनों कम बात करते, लेकिन वही थोड़ी सी बात भी उसे खुशी दे देती थी।
फिर एक दिन गोल्डी बोली,
“कल भैया बाहर चले जाएंगे, फिर बात कैसे करूंगी? फोन तो उन्हीं का मिलता है।”
अमित ने उसे दिलासा दिया — “तुम चिंता मत करो, मैं कुछ करता हूँ।”
उसने अपने दोस्त को पैसे भेजे और गोल्डी के लिए फोन खरीदवा दिया। अब फिर से दोनों पहले की तरह बात करने लगे।
इस कहानी में एक लड़की और भी थी, जिसने दोनों की बहुत मदद की। उसके बिना शायद अमित और गोल्डी फिर कभी बात नहीं कर पाते।
लेकिन धीरे-धीरे हालात बदलने लगे। गोल्डी के घरवालों ने उसकी पढ़ाई बंद करवा दी और उसके लिए लड़का ढूंढना शुरू कर दिया। जब गोल्डी ने अमित को ये बात बताई, तो वो परेशान हो गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे।
छठ पूजा के बाद लड़का देखने की बात सच हो गई। गोल्डी के पापा को लड़का पसंद आ गया। कुछ दिनों बाद लड़के वाले गोल्डी को देखने आए… और वो भी उन्हें पसंद आ गई।
अमित ने पूछा —
“तुमने उस लड़के को मना नहीं किया?”
गोल्डी ने जवाब दिया —
“बात करने का टाइम ही नहीं मिला…”
कुछ ही समय में शादी की बात भी पक्की हो गई। अमित अंदर ही अंदर टूटने लगा, लेकिन कुछ कर नहीं पाया।
धीरे-धीरे सच सामने आने लगा। गोल्डी सामने से कहती थी कि वो अमित से ही शादी करेगी, लेकिन पीछे से उस लड़के की तारीफ भी करती थी। जो लड़की दोनों की मदद करती थी, उसी ने अमित को सच्चाई बताई — कि गोल्डी आपको धोखा दे रही है।
एक दिन टेंशन में आकर अमित ने पहली बार Drink पी ली। कांपती आवाज़ में उसने फोन पर पूछा —
“तुम चाहती क्या हो? मेरी बस यही गलती थी कि मैंने तुम पर खुद से ज्यादा भरोसा किया…”
उसकी आंखों में आँसू थे, लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया।
अमित समझ गया कि शायद ये रिश्ता अब सिर्फ उसके दिल में ही बचा है।
असल वजह ये भी थी कि दोनों अलग गांव के थे, दूरी थी, परिवार की सोच अलग थी। हालात ऐसे थे कि शादी होना आसान नहीं था।
आखिरकार अमित ने खुद को संभाला। उसने सोचा —
“प्यार जबरदस्ती नहीं मिलता…”
दिल ने मान लिया कि गोल्डी अब उसकी नहीं रही।
और एक दिन उसने अपने दिल पर पत्थर रखकर गोल्डी को हमेशा के लिए आज़ाद कर दिया।
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