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Part 3: आख़िरी मुलाकात और अधूरी मोहब्बत

अस्पताल की ICU के बाहर Rahut कई घंटों से बैठा था। उसकी आँखें लाल थीं, हाथ काँप रहे थे, और दिल… जैसे हर पल टूट रहा हो। अंदर डॉक्टर लगातार कोशिश कर रहे थे। मशीनों की आवाज़, नर्सों की फुसफुसाहट — सब कुछ Rahut के लिए किसी डरावने सपने जैसा था। हर मिनट उसे लग रहा था, जैसे ज़िंदगी उससे कुछ छीनने वाली है। आख़िरी बार मिलने की इजाज़त काफी देर बाद एक डॉक्टर बाहर आए। “आप अंदर मिल सकते हैं… पर ज़्यादा देर नहीं।” Rahut की साँस अटक गई। वो धीरे-धीरे ICU के अंदर गया। कमज़ोर मुस्कान Aarti बेड पर लेटी थी। कमज़ोर, थकी हुई… लेकिन चेहरे पर वही पहचान वाली मुस्कान। Rahut ने उसका हाथ थामा। वो हाथ अब पहले जैसा गर्म नहीं था। “Aarti…” उसकी आवाज़ टूट गई। Aarti ने धीरे से आँखें खोलीं। “रो क्यों रहे हो?” वो बहुत हल्की आवाज़ में बोली। अधूरी बातें Rahut ने आँसू रोकते हुए कहा, “तुम ठीक हो जाओगी… हम सब कुछ पूरा करेंगे।” Aarti हल्का सा मुस्कराई। “Rahut… मुझे पता है… अब ज़्यादा समय नहीं है।” Rahut ने सिर हिला दिया, जैसे वो सच को मानने से इंकार कर रहा हो। आख़िरी ख़्वाहिश Aarti ने उसका हाथ और कसकर पकड़ा। “एक वाद...

Part 1: पहली मुलाकात, पहला प्यार


हेल्लो दोस्तों, Welcome to my Blog
जैसे कि मैं हमेशा आप सभी के लिए बेस्ट और दिल को छू लेने वाली कहानियाँ लेकर आता हूँ,
उम्मीद है यह कहानी भी आपको ज़रूर पसंद आएगी ❤️
✍️ Story Writer – समीर साहनी

शाम का समय था।
आसमान में हल्की-हल्की नारंगी रोशनी फैली हुई थी। शहर की एक साधारण सी गली में Rahut रोज़ की तरह अपने छोटे से किराने की दुकान को बंद कर रहा था। ज़िंदगी उसके लिए आसान नहीं थी, लेकिन उसने हालात से समझौता करना सीख लिया था।
Rahut ज़्यादा बोलने वाला लड़का नहीं था।
कम शब्द, गहरी आँखें और दिल में बहुत कुछ छुपाए हुए।
उसी गली में एक नया किराएदार आया था।
उस घर में रहने आई थी — Aarti।
पहली बार Rahut ने उसे तब देखा, जब वह सुबह-सुबह पानी भरने बाहर आई थी।
सादा सूट, खुले बाल, और चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान जो बिना कुछ कहे ही दिल में उतर जाए।
Rahut बस देखता रह गया।
वो कोई फिल्मी पल नहीं था,
बस एक सादा सा सच —
उसे पहली नज़र में कुछ अलग सा महसूस हुआ।
धीरे-धीरे बढ़ती पहचान
Aarti रोज़ Rahut की दुकान से सामान लेने आने लगी।
पहले सिर्फ़ ज़रूरत का सामान,
फिर हल्की सी मुस्कान,
और फिर छोटी-छोटी बातें।
“भैया, ये वाला बिस्किट अच्छा है?”
Rahut मुस्कराकर कहता,
“हाँ… पर वो चाय के साथ ज़्यादा अच्छा लगता है।”
Aarti हँस देती।
Rahut को हैरानी होती थी कि कोई लड़की इतनी सादगी से कैसे हँस सकती है।
दिन बीतते गए।
अब Aarti बिना बात किए वापस नहीं जाती थी।
और Rahut…
वो उसकी आवाज़ सुनने का इंतज़ार करने लगा था।
दोनों की दुनिया अलग थी
Rahut एक मध्यम वर्गीय लड़का था।
पिता नहीं थे।
माँ बीमार रहती थी।
दुकान ही उसका सब कुछ थी।
Aarti पढ़ी-लिखी थी।
नर्सिंग की पढ़ाई कर रही थी।
उसका सपना था — किसी अच्छे अस्पताल में नौकरी करना और लोगों की सेवा करना।
Rahut अक्सर सोचता,
“मैं और वो… क्या ये सही है?”
लेकिन दिल सवाल नहीं पूछता,
वो बस महसूस करता है।
पहली बारिश, पहला एहसास
एक दिन अचानक ज़ोरदार बारिश शुरू हो गई।
Aarti कॉलेज से लौट रही थी और पूरी तरह भीग चुकी थी।
वो Rahut की दुकान के बाहर आकर खड़ी हो गई।
Rahut ने बिना कुछ कहे तौलिया आगे बढ़ाया।
Aarti ने तौलिया लिया और धीरे से कहा,
“Thank you, Rahut…”
पहली बार उसने उसका नाम लिया था।
Rahut का दिल ज़ोर से धड़क उठा।
उस पल, बारिश, गली, दुकान —
सब कुछ जैसे थम सा गया।
दोस्ती से प्यार तक
अब दोनों अक्सर बातें करने लगे।
कभी दुकान के बाहर खड़े होकर,
कभी चाय पीते हुए।
Aarti Rahut को अपने सपनों के बारे में बताती।
Rahut अपनी मजबूरियों के बारे में।
एक दिन Aarti ने कहा,
“Rahut, तुम बहुत अच्छे हो… बस खुद को कम मत समझा करो।”
ये शब्द Rahut के लिए बहुत बड़े थे।
उस रात वो सो नहीं पाया।
प्यार का इज़हार
एक शाम Rahut ने हिम्मत जुटाई।
दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
उसने कहा,
“Aarti… मुझे नहीं पता मैं सही हूँ या नहीं…
लेकिन मैं तुमसे बहुत प्यार करने लगा हूँ।”
Aarti चुप रही।
कुछ सेकंड…
जो Rahut के लिए पूरी ज़िंदगी जैसे थे।
फिर Aarti की आँखों में हल्की नमी आ गई।
उसने कहा,
“Rahut… मैं भी।”
उस दिन दोनों ने कोई वादा नहीं किया।
कोई कसम नहीं खाई।
बस एक-दूसरे के साथ चलने का मन बना लिया।
खुशी ज़्यादा देर की नहीं थी
ज़िंदगी हमेशा एक जैसी नहीं रहती।
Aarti की तबीयत अचानक खराब रहने लगी।
थकान, चक्कर, कमजोरी।
वो इसे नज़रअंदाज़ करती रही।
Rahut बार-बार कहता,
“डॉक्टर को दिखाओ।”
Aarti मुस्करा देती,
“कुछ नहीं है… बस थकान है।”
लेकिन Rahut का दिल बेचैन रहने लगा था।
एक अनजाना डर
एक रात Aarti बेहोश हो गई।
Rahut घबरा गया।
उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया।
डॉक्टरों के चेहरे गंभीर थे।
Rahut बाहर बेंच पर बैठा,
हाथों में सिर दबाए,
मन ही मन बस एक ही दुआ —
“हे भगवान, उसे कुछ मत होने देना।”
यहीं से कहानी ने एक दर्दनाक मोड़ लेना शुरू किया…




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