हेल्लो दोस्तों, Welcome to my Blog
जैसे कि मैं हमेशा आप सभी के लिए बेस्ट और दिल को छू लेने वाली कहानियाँ लेकर आता हूँ,
उम्मीद है यह कहानी भी आपको ज़रूर पसंद आएगी ❤️
✍️ Story Writer – समीर साहनी
कहते हैं जब नसीब खराब होता है ना,
तो इंसान की मति मारी जाती है।
और शायद वही मेरे साथ भी हुआ।
ये कोई कहानी नहीं है,
ये मेरी ज़िंदगी की हकीकत है।
मैं और गोल्डी कैसे मिले,
कैसे पास आए,
और फिर कैसे सब कुछ बदल गया…
आज वही आप सबको बता रहा हूँ।
मज़ाक से शुरू हुआ रिश्ता
एक दिन मैं और मेरा दोस्त यूँ ही घूमने निकले थे।
दोस्त के फोन पर उसकी गर्लफ्रेंड का कॉल आ गया।
वो बातों में इतना मगन हो गया कि मुझे अकेलापन चुभने लगा।
मैंने मज़ाक-मज़ाक में ही उसकी गर्लफ्रेंड से कह दिया,
“सिर्फ तुम दोनों ही बात करोगे?
मेरा क्या?
मेरी भी कहीं सेटिंग करवा दो।”
वो हँस पड़ी और बोली,
“ठीक है, मेरी एक दोस्त है…
उससे बात करवा देती हूँ।”
मुझे क्या पता था
कि वो मज़ाक
मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा मोड़ बन जाएगा।
गोल्डी की पहली कॉल
शाम को मुझे एक नंबर मिला — गोल्डी का।
दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं।
मन में बस एक ही बात थी,
“अब मैं अकेला नहीं रहूँगा।”
पहली बार जब हम फोन पर बात किए,
दोनों ही नर्वस थे।
मैं बोलना चाहता था,
पर शब्द साथ नहीं दे रहे थे।
कुछ देर की खामोशी के बाद
उसने धीरे से पूछा,
“अमित…
क्या आप कभी किसी से प्यार किए है?”
मैंने कोई झूठ नहीं बोला।
जो था, जैसा था,
सब सच-सच बता दिया।
फिर मैंने भी उससे वही सवाल पूछा।
उसने भी बिना कुछ छुपाए
अपनी पूरी सच्चाई रख दी।
हमने तय किया था —
रिलेशन में आने से पहले
कोई झूठ नहीं, कोई दिखावा नहीं।
पहली मुलाकात का इंतज़ार
हमारी बातें बढ़ने लगीं।
दिन-रात फोन पर ही रहते।
एक दिन मैंने कहा,
“गोल्डी, मुझे तुम्हें देखना है।”
वो बोली,
“मेरे पेपर आने वाले हैं,
आप कॉलेज आ जाइएगा।”
मैं पागल सा हो गया था उसे देखने के लिए।
हम कभी वीडियो कॉल नहीं कर पाए थे,
क्योंकि वो अपने पापा के साधारण फोन से कॉल करती थी।
पेपर वाले दिन
मैं कॉलेज पहुँचा,
थोड़ा लेट हो गया।
गोल्डी अंदर जा चुकी थी।
मैं बाहर बैठकर
बस उसी का इंतज़ार करता रहा।
पेपर खत्म हुआ।
उसने अपनी फ्रेंड के फोन से कॉल किया और बोली,
“आप आए हो ना?”
फिर बोली,
“मैं इस रंग की सूट पहने
इस जगह खड़ी हूँ।”
जैसे ही मैं वहाँ पहुँचा…
और उसे पहली बार देखा…
दिल वहीं थम सा गया।
सामने खड़ी गोल्डी
मेरी उम्मीद से कहीं ज़्यादा प्यारी थी।
थोड़ी बातें हुईं,
फिर वो बोली,
“अब जाना होगा,
मेरी फ्रेंड वेट कर रही है।”
और वो चली गई…
पर मेरे दिल में
अपनी जगह बना गई।
मोबाइल और बढ़ती नज़दीकियाँ
एक दिन मैंने कहा,
“तुम्हारे पास स्मार्टफोन क्यों नहीं है?”
पहले मना किया,
लेकिन मेरी ज़िद के आगे मान गई।
मैंने कॉलेज जाकर उसे फोन दिया।
उसी शाम
उसी फोन से उसकी कॉल आई।
अब हमारी बातें
सिर्फ आवाज़ तक सीमित नहीं थीं।
वीडियो कॉल पर
रात से सुबह कब हो जाता
पता ही नहीं चलता। था
होली वाला दिन
हम मिलने का प्लान बना रहे थे।
फिर वो दिन आया —
होली से एक दिन पहले।
वो अपनी दीदी की लड़की के साथ आई।
ज़्यादा कुछ नहीं हो पाया,
पर हमने साथ होली खेली।
उसने मुझे रंग लगाया,
और उस पल
मैं खुद को दुनिया का
सबसे खुश इंसान समझ रहा था।
जब वो सीने से लिपट गई
कुछ दिन बाद
उसने अकेले आने के लिए हाँ कर दी।
कॉल कटते ही
हम दोनों अपने-अपने घर से निकल पड़े।
जैसे ही वो आई,
सीधे मेरे पास आकर
मेरे सीने से लिपट गई।
इतनी कसकर पकड़ा
कि छोड़ने का नाम ही नहीं ले रही थी।
मैंने मज़ाक में कहा,
“बस ऐसे ही पकड़े रहोगी?
आगे का क्या?”
वो हँस पड़ी…
फिर मासूमियत से बोली,
“अमित,
आप हमें कभी छोड़ेंगे तो नहीं ना?”
मैंने बिना सोचे कहा,
“नहीं मेरी जान।”
फिर उसने पूछा,
“आप हमसे शादी तो करेंगे ना?”
और मैंने कहा,
“हाँ… जरूर।”
वो पल
मेरी ज़िंदगी का
सबसे खूबसूरत पल था।
जब सब कुछ बदल गया
लेकिन खुशियाँ
ज़्यादा दिन नहीं टिकीं।
गोल्डी की दीदी की लड़की ने
उसके पापा को
हम दोनों के बारे में सब बता दिया।
मोबाइल,
मुलाकातें,
सब कुछ।
अगले ही दिन
उसके बड़े पापा का लड़का
राजेश
उसके कमरे में चेक करने आया।
मोबाइल मिल गया।
फिर गोल्डी के पापा ने
उसे मेरे पास कॉल करने को कहा।
उसकी आवाज़ काँप रही थी,
“अमित…
घर में सबको पता चल गया है।”
फिर फोन
उसके पापा ने ले लिया।
उन्होंने मुझसे
घर का पता,
पापा का नाम
सब पूछा।
मैंने कुछ भी नहीं छुपाया।
उन्होंने कहा,
“मैं आ रहा हूँ।”
मैंने कहा,
“आ जाइए।”
मैं इंतज़ार करता रहा…
लेकिन कोई नहीं आया।
दो दिन बाद
गोल्डी का भाई
और राजेश
मेरे घर आ गए।
उसी दिन
मेरे चाचा नागपुर से आए थे,
पापा भी घर पर थे।
अब सवाल बस एक था —
अब मेरे साथ क्या होगा?
डर तो था…
पर मैंने हिम्मत नहीं हारी।
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